hain ab is fikr men doobe hue ham | हैं अब इस फ़िक्र में डूबे हुए हम

  - Shariq Kaifi

हैं अब इस फ़िक्र में डूबे हुए हम
उसे कैसे लगे रोते हुए हम

कोई देखे न देखे सालहा-साल
हिफ़ाज़त से मगर रक्खे हुए हम

न जाने कौन सी दुनिया में गुम हैं
किसी बीमार की सुनते हुए हम

रहे जिस की मसीहाई में अब तक
उसी के चारागर होते हुए हम

गिराँ थी साए की मौजूदगी भी
अब अपने आप से सह
में हुए हम

कहाँ हैं ख़्वाब में देखे जज़ीरे
निकल आए किधर बहते हुए हम

बढ़ीं नज़दीकियाँ इस दर्जा ख़ुद से
कि अब उस का बदल होते हुए हम

रखें क्यूँँकर हिसाब एक एक पल का
बला से रोज़ कम होते हुए हम

बहुत हिम्मत का है ये काम 'शारिक़'
कि शरमाते नहीं डरते हुए हम

  - Shariq Kaifi

Irada Shayari

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