मेरी ख़्वाहिश मेरी ज़रूरत है

इश्क़ मेरा वो मेरी चाहत है

चाँद तारों को रश्क होता है
कोई उन से भी ख़ूब-सूरत है

नेमतें मुझ पे बरसी हैं रब की
वो ख़ुदा की कोई इनायत है

ज़ुल्फ़ें उस की हैं बादलों की तरह
और गुलाबी सी उस की रंगत है

ज़िन्दगी ख़ुशनुमा है उस के संग
जान मेरी वो मेरी जन्नत है

मैं मुसाफ़िर हूँ एक भटका सा
उस की बाहें ही मेरी राहत है

शोख़ है तितलियों के जैसी वो
उस
में गुल की तरह नज़ाकत है

आरज़ू है 'अमन' की पहली और
"हैफ़" की आख़िरी वो हसरत है

— Aman Kumar Shaw "Haif"

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