tumhaari baat se sach jhooth ka imkaan nahin hota | तुम्हारी बात से सच झूठ का इम्काँ नहीं होता

  - Shivang Tiwari

तुम्हारी बात से सच झूठ का इम्काँ नहीं होता
अगर तुम साफ़ होते तो मेरा नुक़साँ नहीं होता

अजी इंसानियत तो मुफ़लिसों के घर में होती है
अमीरों की इमारत में कोई इंसाँ नहीं होता

अगर ये मुल्क ज़िन्दा है तो बस आवाम के दम पे
जो चलती हुक्मरानों की तो हिन्दुस्ताँ नहीं होता

घटाएँ, बिजलियाँ, बारिश, तलातुम सब छलावा है
हमारे वस्ल के जैसा कोई तूफ़ाँ नहीं होता

करो कुछ काम अच्छे और किसी के काम आ जाओ
‘शिवम्' रब की इबादत से ही तो रमज़ाँ नहीं होता

  - Shivang Tiwari

Ibaadat Shayari

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