जहाँ अक़्सर मुयस्सर हो वो महफ़िल ढूँढ़ लो जा कर
भटकती फिर रही कश्ती का साहिल ढूँढ़ लो जा कर
सुख़नवर हैं हमें दुनिया फ़क़त पागल बताएगी
यही अच्छा रहेगा कोई क़ाबिल ढूँढ़ लो जा कर
बड़े उस्ताद हो तुम अहद-ए-तर्क-ए-इश्क़ में हैं ना
हमें बख़्शो कहीं पर और हम दिल ढूँढ़ लो जा कर
— Shubham Mishra















