कई अरसे से है दिल में बता कर देखता हूँ अब
कहानी वो मुहब्बत की सुना कर देखता हूँ अब
जो उस सेे गुफ़्तगू कर लूँ मेरे ग़म दूर हो जाएँ
कभी उस को गले अपने लगाकर देखता हूँ अब
ज़माने में सुख़नवर हैं कई मारे हुए उसके
मैं ग़ज़लों में उसे अपनी सज़ाकर देखता हूँ अब
जहाँ को देखता है वो नज़र मेरी वहीं को हो
मैं रिश्ता इस क़दर उस सेे बनाकर देखता हूँ अब
उसे प्यारे बहुत हैं ये चमकते चाँद-ओ-तारे
मैं ख़ुद को जुगनुओं जैसे जलाकर देखता हूँ अब
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