Vish
Vish
Ghazal

होने को तो ऐसा भी हो सकता था

वो चाहता तो मेरा भी हो सकता था

सहरा में वो दरिया देख था कितना ख़ुश
ये आँखों का धोका भी हो सकता था

बस ये सोच के मैं हुजरे में दुबक गया
बाहर जान का ख़तरा भी हो सकता था

राजा की तलवार गिराई जिस ने 'विष'
वो अदना सा प्यादा भी हो सकता था

— Vish

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