ख़्वाहिशों का क़त्ल कर ख़ुद ही लगानी आग है
ख़ाक होते ख़्वाब की सारी कहानी आग है
जिस्म की चादर में छुपती हर जवानी आग है
नाम दे कर इश्क़ का सब को बुझानी आग है
एक दिल पत्थर तुम्हारा एक दिल पत्थर मिरा
दोनों दिल टकरा गए तो सिर्फ़ आनी आग है
झूट हैं रिश्ते ये नाते सच है केवल मौत ही
आख़िरी साथी सभी का ख़ाक पानी आग है
— Dr Bhagyashree Joshi















