मुदामलेकेमुझेहल्क़ा-वारनाचतीहै
जिधरचलूँनिगह-ए-तरह-दारनाचतीहै
मिलाहैवा'दा-ए-फ़र्दाबजाएनक़्द-ए-विसाल
हमारीरूहकोदेखोउधारनाचतीहै
येकिसनज़रनेतिलिस्म-ए-ख़िज़ाँकोकाटदिया
पलकझपकतेमेंहरसूबहारनाचतीहै
फिरेमलूलवोदरगाहकेअहातेमें
औरआएवज्दमेंतोबे-शुमारनाचतीहै
पटख़केसरकभीरोताहैहिज्रकाआज़ार
उमीद-ए-वस्लकभीबारबारनाचतीहै
वहीनहींउसेदरकारइज़्न-ए-ख़ाकीथा
जोमिलगयातोयेमुश्त-ए-ग़ुबारनाचतीहै
हमारीरूह'तबस्सुम'सुख़नकीहैजोगन
ग़ज़लकेगरकहींछिड़जाएँतारनाचतीहै