बस हकी़क़त के सर नहीं काटे
सच दिखाए ख़बर नहीं काटे
जीना मुश्किल उस आदमी के लिए
ज़िंदगी जो बसर नहीं काटे
इश्क़ में चाहते हैं ये लड़के
फोन वो रात भर नहीं काटे
इस सदी का है ये लकड़हारा
जो लगाए शजर नहीं काटे
ज़ख़्म बन जाए काटना तारिक
कोई भी इस क़दर नहीं काटे
— Tarique Jamal















