गर ख़ुशी की तरफ़ चले जाते
ज़िन्दगी की तरफ़ चले जाते
तुम ना आते जो वक़्त पर हम तो
ख़ुद-कुशी की तरफ़ चले जाते
जिस से पुर हो कमी तुम्हारी भी
उस कमी की तरफ़ चले जाते
इतनी अच्छी लगी तो क्यूँ आए
आप उसी की तरफ़ चले जाते
हम तो मालिक थे अपनी मर्ज़ी के
हम किसी की तरफ़ चले जाते
आप से तो क़रीब साहिल था
जल परी की तरफ़ चले जाते
— Tarique Jamal















