teri aankhoñ men utar kar ye ha | तेरी आँखों में उतर कर ये हमें क्या हुआ है

  - Haider Khan

तेरी आँखों में उतर कर ये हमें क्या हुआ है
ऐसे चमके हैं कि हर सम्त उजाला हुआ है

उस के घर लेने उसे आया हूँ मैं और उस ने
हाथ में और कोई नाम रचाया हुआ है

अब ये ग़म ले के भला जाऊँ तो जाऊँ मैं किधर
जो लगाता था गले उस से ही झगड़ा हुआ है

जब-तलक सिर्फ़ ख़ुदा था ये जहाँ बेहतर था
जब हुए लोग ख़ुदा तो ये तमाशा हुआ है

बाप की फ़िक्र भी जाएज़ है कि बच्चों की तरह
उस ने भी ख़्वाब जवानी में ये देखा हुआ है

तुम ने धोखा ही नहीं खाया अभी तक "हैदर"
या'नी दुनिया ने तुम्हें धोखे में रक्खा हुआ है

  - Haider Khan

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