तेरी आँखों में उतर कर ये हमें क्या हुआ है
ऐसे चमके हैं कि हर सम्त उजाला हुआ है
उस के घर लेने उसे आया हूँ मैं और उस ने
हाथ में और कोई नाम रचाया हुआ है
अब ये ग़म ले के भला जाऊँ तो जाऊँ मैं किधर
जो लगाता था गले उस से ही झगड़ा हुआ है
जब-तलक सिर्फ़ ख़ुदा था ये जहाँ बेहतर था
जब हुए लोग ख़ुदा तो ये तमाशा हुआ है
बाप की फ़िक्र भी जाएज़ है कि बच्चों की तरह
उस ने भी ख़्वाब जवानी में ये देखा हुआ है
तुम ने धोखा ही नहीं खाया अभी तक "हैदर"
या'नी दुनिया ने तुम्हें धोखे में रक्खा हुआ है
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