बादल पर चलते हैं अक्सर ऐसा लगता है
अपना अपना जिन को सपना सच्चा लगता है
प्यास बुझा दे बूँद भी तो उस को सागर कह दूँ
एसे देखूँ तो सागर भी प्यासा लगता है
मुझ को हँसना आया जब उस ने बोला ग़ुस्सा हूँ
वो तो ग़ुस्से में भी कितना प्यारा लगता है
उठ के शीशे में जब देखा तो ये देखा है
मुझ को अपना चेहरा तेरा चेहरा लगता है
— Toyesh prakash















