करता है कोई बात बहुत आसमान से
आवाज़ लौटती भी नहीं इस मकान से
रौशन करे जहान को ख़ुद को करे फ़ना
धोती है हाथ मोम भी तो अपनी जान से
ग़लती हुई कहा के ग़ज़ब चाल आप की
इतरा के चल दिए हो तो अपनी ही शान से
कुछ भी कहा नहीं वो उठे और चल दिए
रोका तो बोलते हैं न सुनते हैं कान से
ऐलान ए इश्क़ जब से किया है निगाह ने
कहते हैं उस को अपनी मोहब्बत गुमान से
इतरा न हम पे और ऐ तोयेश मान ले
वाक़िफ बहुत हैं हम भी सुख़न की ज़बान से
— Toyesh prakash















