तेरी बातें ग़ज़ल में हम पिरोएंगे
मिले फ़ुर्सत लिपट ख़ुद से ही रोएंगे
सुना कर लोरियाँ सब को सुलाता है
अजल की गोद में हम-तुम भी सोएंगे
समुंदर आँख में जिस के हो सिमटा
उसे बारिश ग़मों के क्या भिगोएंगे
बिछड़ना इश्क़ में मरने ही जैसा है
समझ आएगी जब अपने को खोएंगे
— Vedic Dwivedi















