तय किया जाए कि जाना अब कहाँ है

लौट कर हम को भी आना अब कहाँ है

थी मिला करती विदाई लौटने पर
वो चलन आख़िर पुराना अब कहाँ है

बोझ कंधे पर उठा घर का लिया वो
घर में बेटे का ठिकाना अब कहाँ है

रात को क़िस्से नए बाबा सुनाते
खेत में लेकिन मचाना अब कहाँ है

एक ही था कल लुटा आए उसी पर
हूँ नहीं तो जाँ लुटाना अब कहाँ है

ये मदद तुम लोगी भी तो कैसे लोगी
था कभी "दीपक" दिवाना अब कहाँ हैं

— Vedic Dwivedi

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Mehboob Shayari

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