यक़ीं है कि हर कोई इज़्ज़त करेगा
मगर क्या मुझी सा मुहब्बत करेगा
चलेगा नहीं ज़ोर हम पे किसी का
बताए वो कैसे हुकूमत करेगा
पता था मुझे बा'द रुख़सत के मेरे
मुझे फिर से पाने कि मिन्नत करेगा
कहेंगे वही जो है दिल में हमारे
हुआ क्या अगर हम से नफ़रत करेगा
करूँं गौ़र क्यूँ उस कि ग़लती पे मैं भी
अभी है वो बच्चा शरारत करेगा
— Vedic Dwivedi















