मशवरा है ये बेहतरी के लिए
हम बिछड़ जाते हैं अभी के लिए
प्यास ले जाती है नदी की तरफ़
कोई जाता नहीं नदी के लिए
आप दीवार कह रहे हैं जिसे
रास्ता है वो छिपकली के लिए
नील से पहले चाँद पर मौजूद
एक बुढ़िया थी मुख़बिरी के लिए
— Vikram Sharma
हम बिछड़ जाते हैं अभी के लिए
प्यास ले जाती है नदी की तरफ़
कोई जाता नहीं नदी के लिए
आप दीवार कह रहे हैं जिसे
रास्ता है वो छिपकली के लिए
नील से पहले चाँद पर मौजूद
एक बुढ़िया थी मुख़बिरी के लिए
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