दिल नहीं है मेरा हर किसी के लिए
वक़्त मुझ को नहीं आशिक़ी के लिए
इक तेरी चाह है हर किसी को मगर
तू बनी तो नहीं हर किसी के लिए
अब भरोसा कहाँ है किसी का यहाँ
ख़तरा है आदमी आदमी के लिए
मौत से सामना रोज़ होता है अब
रोज़ मरता हूँ मैं ज़िन्दगी के लिए
दरिया हूँ और प्यासा भी हूँ या'नी ये
ख़ुद सबब हूँ मैं अपनी कमी के लिए
— Vivek Chaturvedi















