वो लोग सब के सब हमारे लोग हैं

जो भी मोहब्बत के ही मारे लोग हैं

हम अपने जानिब से अकेले हैं मगर
दुश्मन के जानिब भी हमारे लोग हैं

काफ़ी हैं आँखें ये किसी के क़त्ल को
ये लोग हाए कितने प्यारे लोग हैं

हैरत है प्यासे कैसे रह जाते हैं वो
जो भी समुंदर के किनारे लोग हैं

— Vivek Chaturvedi

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