Akhtar Muslimi

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@akhtar-muslimi

Akhtar Muslimi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Akhtar Muslimi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Ghazal
कहाँ जाएँ छोड़ के हम उसे कोई और उस के सिवा भी है
वही दर्द-ए-दिल भी है दोस्तो वही दर्द-ए-दिल की दवा भी है

मिरी कश्ती लाख भँवर में है न करूँँगा मैं तिरी मिन्नतें
ये पता नहीं तुझे नाख़ुदा मिरे साथ मेरा ख़ुदा भी है

ये अदा भी उस की अजीब है कि बढ़ा के हौसला-ए-नज़र
मुझे इज़्न-ए-दीद दिया भी है मिरे देखने पे ख़फ़ा भी है

मिरी सम्त महफ़िल-ए-ग़ैर में वो अदा-ए-नाज़ से देखना
जो ख़ता-ए-इश्क़ की है सज़ा तो मिरी वफ़ा का सिला भी है

जो हुजूम-ए-ग़म से है आँख नम तो लबों पे नाले हैं दम-ब-दम
उसे किस तरह से छुपाएँ हम कहीं राज़-ए-इश्क़ छुपा भी है

ये बजा कि 'अख़्तर'-ए-मुस्लिमी है ज़माने भर से बुरा मगर
उसे देखिए जो ख़ुलूस से तो भलों में एक भला भी है
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माइल-ए-लुत्फ़ है आमादा-ए-बे-दाद भी है
वो सरापा-ए-मोहब्बत सितम-ईजाद भी है

शब-ए-तन्हाई भी है साथ तिरी याद भी है
दिल का क्या हाल कहूँ शाद भी नाशाद भी है

दौलत-ए-ग़म से हर इक गोशा है इस का मामूर
दिल की दुनिया मिरी आबाद भी बर्बाद भी है

बे-सबब तो नहीं एहसास ख़लिश का मुझ को
भूलने वाले तिरे दिल में मिरी याद भी है

क्यूँँ न आसाँ हो रह-ए-इश्क़ कि मेरे हम-राह
जज़्बा-ए-'क़ैस' भी है हिम्मत-ए-'फ़रहाद' भी है

जल गया अपना नशेमन मगर अफ़सोस ये है
फूँकने वालों में इक बर्क़-ए-चमन-ज़ाद भी है

मेरा विज्दान मुहर्रिक है मिरे नग़्मों का
तब्-ए-मौज़ूँ मिरी पाबंद भी आज़ाद भी है

क्या बताऊँ मैं तुम्हें क्या है नवा-ए-'अख़्तर'
नग़्में का नग़्मा है फ़रियाद की फ़रियाद भी है
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