Akhtar Muslimi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Akhtar Muslimi's shayari and don't forget to save your favorite ones.
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Ghazal
मिरे वास्ते जहाँ में कोई दिलकशी नहीं है कि तिरे बग़ैर जीना कोई ज़िंदगी नहीं है
तिरी ज़ात के अलावा मुझे और चाहिए क्या तू अगर है साथ मेरे मुझे कुछ कमी नहीं है
वो नज़र नज़र नहीं है न हो जिस में अक्स तेरा कोई दिल है वो भी जिस में ग़म-ए-आशिक़ी नहीं है
कोई वास्ता नहीं है जिसे दर्द-ए-दीगराँ से वो है आदमी का पैकर मगर आदमी नहीं है
मिरे दोस्तो न देखो मुझे चश्म-ए-ख़शमगीं से कि रहीन-ए-बादा-नोशी मिरी बे-ख़ुदी नहीं है
मिरे दिल के दाग़ तू ही ज़रा और लौ बढ़ा दे शब-ए-ग़म है तीरा तीरा कहीं रौशनी नहीं है
मिरी बात सुन के 'अख़्तर' सुनी अन-सुनी न कर दो ये हदीस-ए-जान-ओ-दिल हे निरी शाइ'री नहीं है