जब बनाया सभी ने तमाशा हमें
वक़्त ने ही सिखाया सलीक़ा हमें
ज़िंदगी में कभी कुछ मिला ही नहीं
चाहिए था सभी कुछ ही पूरा हमें
छत है दीवार है हिज्र है दर्द भी
अब फ़क़त चाहिए एक शाना हमें
काट लूँ पेड़ पहले बयाबान के
फिर उठाना है अपना जनाज़ा हमें
— Yashvardhan Mishra 'Hind'















