पुराने सब दरख़्तों को गिराना बुज़दिलाना है
यहाँ सच्ची किताबों को जलाना बुज़दिलाना है
कहानी में नगर के हार क्यूँ सच की हुई हरपल
ज़माने में मगर सच को थकाना बुज़दिलाना है
घरों से नींव के पत्थर हटाने का बहाना है
बुज़ुर्गों को सहन में ही सुलाना बुज़दिलाना है
बहुत अच्छा बहुत अच्छा बता कर जान ले लेना
यहाँ अच्छे सभी को अब मिटाना बुज़दिलाना है
अकेले माँ को' तन्हा कर तुझे क्यूँ शहर है जाना
सुनो भी गाँव को यूँँ छोड़ जाना बुज़दिलाना है
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