purane sab darkhton ko girana buzadilaana hai | पुराने सब दरख़्तों को गिराना बुज़दिलाना है

  - Tarun Pandey

पुराने सब दरख़्तों को गिराना बुज़दिलाना है
यहाँ सच्ची किताबों को जलाना बुज़दिलाना है

कहानी में नगर के हार क्यूँ सच की हुई हरपल
ज़माने में मगर सच को थकाना बुज़दिलाना है

घरों से नींव के पत्थर हटाने का बहाना है
बुज़ुर्गों को सहन में ही सुलाना बुज़दिलाना है

बहुत अच्छा बहुत अच्छा बता कर जान ले लेना
यहाँ अच्छे सभी को अब मिटाना बुज़दिलाना है

अकेले माँ को' तन्हा कर तुझे क्यूँ शहर है जाना
सुनो भी गाँव को यूँँ छोड़ जाना बुज़दिलाना है

  - Tarun Pandey

Shahr Shayari

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