hamaare saath koi mas'ala furaat ka hai | हमारे साथ कोई मसअला फुरात का है

  - Zia Mazkoor

हमारे साथ कोई मसअला फुरात का है
वगरना इल्म उसे अपनी मुश्किलात का है

मेरे हिसाब से माज़ुरी हुस्न है मेरा
अगर ये ऐब है तो भी ख़ुदा के हाथ का है

इक आधे काम के ह़क़ में तो खैर मैं भी हूँ
तुम्हारे पास तो दफ़्तर शिफारिशात का है

हमारी बात का जितना वसीअ पहलू है
जुबां पे लाने में नुकसान कायनात का है

हम उसके होने ना होने पे कितना लड़ रहे हैं
किसी के वास्ते यह खेल नफ्सियात का है

  - Zia Mazkoor

Khuda Shayari

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