आ भी जाओ न कभी नींद में ख़्वाबों की तरह
ज़िन्दगी रंग भी दो मेरी गुलाबों की तरह
ख़ुद को सूरज की तरह तुम भी चमकदार करो
इश्क़ खै़रात करो तुम भी किताबों की तरह
ख़ुशबुओं जैसे हर इक सम्त सजाए रक्खो
गुल का व्यापार करो दिल से बहारों की तरह
दोस्ती मत ही करो या तो करो फिर ऐसी
साथ छूटे नहीं नदिया के किनारों की तरह
शहर वीरान हूँ अब मुझको न आबाद बना
आती जाती ही बनी रहना हवाओं की तरह
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