वो शख़्स अपनी बात से ऐसे मुकर गया

बरसे बिना ही जैसे हो बादल गुज़र गया

वो छोड़ कर के कह रही थी मुझ को ख़ुश रहो
आज़ाद कर के जैसे कोई पर कतर गया

फिर से किसी ने बे-वफ़ा की बात छेड़ दी
जो ज़ख़्म भर गया था वो फिर से उभर गया

जो कह रहा था प्यार में जन्नत का है मज़ा
मुझ को बताओ यार वो बन्दा किधर गया

तुम जिस को ढूँढ़ते हुए अब आई हो ख़ुशी
ये शख़्स कोई और है वो शख़्स मर गया

दिल के मुआमलों में मिरी अक़्ल मर गई
जाना नहीं था उस गली हाँ मैं मगर गया

— Lakhan Vaishnav "Aasmaan"

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