दिल में मेरे इस तरह पलती है नफ़रत
राख से फिर आग बन जलती है नफ़रत
ख़ुश रहा हम से बिछड़ कर वो हमेशा
इस तरह फूलों सी फिर फलती है नफ़रत
इश्क़ में सारी हदें जब लाॅंघ दी थीं
तब मुहब्बत से हुई ग़लती है नफ़रत
शे'र ने जंगल में फिर सब को लड़ाया
बादशाही शौक़ से चलती है नफ़रत
नर्म लहजा, शांत मन, दिल में मुहब्बत
बस ज़रा विश्वास से टलती है नफ़रत
— kanak anamika khantwal















