मैं दिल की ख़ूब-सूरत इक कहानी छोड़ आया हूँ
कल उस की खिड़की पे मैं रातरानी छोड़ आया हूँ
वो कहते हैं कि देखो, दास के लहजे में नरमी है
मैं कहता हूँ कि मैं अपनी जवानी छोड़ आया हूँ
निभा पाया नहीं फिर कोई रिश्ता दिल से, के जबसे
मैं उस इक शख़्स से यारी पुरानी छोड़ आया हूँ
— Das Kanpuri















