ज़िंदगी ही तमाम कर बैठे
मौत का इंतिज़ाम कर बैठे
काम को जिस मना किया सब ने
हम वहीं एक काम कर बैठे
अब कहे तो किसे वो हाल-ए-दिल
दोस्त भी जिस को आम कर बैठे
क्या हुआ था हमें ख़ुदा जाने
ख़ुद को तेरा ग़ुलाम कर बैठे
इश्क़ करना हराम है 'जानिब'
और तुम भी हराम कर बैठे
— Janib Vishal















