दुनिया ने बेकार समझकर फेंक दिया
तुम ने भी तो ख़ैर ये गौहर फेंक दिया
मुश्किल से तो ज़ब्त की आदत डाली थी
उस ने फिर पानी में कंकर फेंक दिया
मतलब तो था यार नशे से सो हम ने
उस की आँखें देखी सागर फेंक दिया
टूटा तो मैं एक से एक हज़ार हुआ
ख़ूब ये तुम ने मुझ पर पत्थर फेंक दिया
उस के हाथ में गुल-दस्ता था क्या करते
हम ने अपने हाथ का ख़ंजर फेंक दिया
फिर मेरी तफ़्सील कहाँ तक मुमकिन थी
जिस ने मुझ को खोला पढ़कर फेंक दिया
हाए मेरी प्यास की शिद्दत से जल कर
उस ने मेरी सम्त समुंदर फेंक दिया
उस की आमद ने ये ज़ुल्म किया मुझ पर
तन्हाई के वज्द से बाहर फेंक दिया
काश सितारा होता रौशन रहता मैं
क्यूँ धरती पर बंदा-पर्वर फेंक दिया
हम को उस ने काँटा-छाँटा ख़ूब 'करन'
बस मतलब का रक्खा दीगर फेंक दिया















