KARAN

KARAN

@Karan_Kataria

KARAN shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in KARAN's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Shayari
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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm

शजर से धूप से पैरों से रहगुज़र से पूछ
सफ़र का लुत्फ़ रफ़ीक़ाने हमसफ़र से पूछ

जिसे भी छोड़ दिया उम्र-भर को छोड़ दिया
मेरे मिज़ाज के बारे में शहर-भर से पूछ

KARAN

आया, क़रीब बैठ के कहने लगा कि बस
इतना ही सिर्फ़ हमसे तुम्हें प्यार था कि बस

होंठो का लम्स था कि नशा था शराब का
उसने लबों पे आज यूँ बोसा रखा कि बस

KARAN

शरफ़ मिला न कभी चाँद देखने का हमें
वो ख़ुश-नसीब हैं, जो तुझको देखते होंगे

KARAN

दर्द का आलम सुनहरा, भेज दे
काश माज़ी, लुत्फ़-ए-ईज़ा भेज दे

वाक़या, दिल टूट जाने का मेरे
और तेरे ज़ुल्मों का, किस्सा भेज दे

KARAN

वहशत-ए-ग़म को आज़माना है
चोट खाकर भी, मुस्कुराना है

मौत आकर, रिहा करा मुझको
ख़ाना-ए-तन भी क़ैद-ख़ाना है

KARAN
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ज़ीस्त की खोखली हैहात पे रह जाते हैं
वो जो कमज़र्फ़ हैं, औक़ात पे रह जाते हैं

ओढ़ लेती है शराफ़त की रिदा रोज़ सहर
और इल्ज़ाम फ़क़त रात पे रह जाते हैं

KARAN
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मत करो बे-लिबास, रहने दो
इन ज़मीनों पे, घास रहने दो

बढ़ते शहरों की, वहशतें रोको
ये ज़मीं, ख़ुश-लिबास रहने दो

KARAN
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