
और क्या यार चाहता हूँ मैं
बस तेरा प्यार चाहता हूँ मैं
जो चले उम्र भर मेरे बाहम
दोस्त दो चार चाहता हूँ मैं
दोस्ती हो या दुश्मनी यारब
आर या पार चाहता हूँ मैं
जिस से शिकवा न हो किसी को भी
हाँ वो किरदार चाहता हूँ मैं
जो मिटा दे जहाँ से नफरत को
ऐसी सरकार चाहता हूँ मैं
जीत भी जाऊँ गर ज़माने को
आपसे हार चाहता हूँ मैं
वक़्त आख़िर है आ भी जा ज़ालिम
सिर्फ़ दीदार चाहता हूँ मैं
— Kumar Aryan















