khayal | “ख़याल”

  - Praveen Sharma SHAJAR

“ख़याल”

मैं ये रोज़ सोचता हूँ
तुमको फ़ोन करूँँ लेकिन
एक ख़याल सताता है
तुम से बात जो कर लूँगा
मन हलका हो जाएगा

फिर तुम सादा दिल भी हो
मुझको माफ़ भी कर दोगी
फिर हम बात करेंगे रोज़
मैं उम्मीद लगा लूँगा
फिर इक दिन ऐसा होगा
तुम उस दोस्त के पास में होगी
मैं तन्हा रह जाऊँगा
फिर मुझको रोना होगा

आख़िर में जब रोना है
तो मैंने ये सोचा है
तुमको फ़ोन भी क्यूँँ करना
मैं यूँँ ही रो लेता हूँ

  - Praveen Sharma SHAJAR

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