सोच कर तुझ को ही सजाया है
दिल ज़मीं पे शजर लगाया है
जो महक है गुलाब के अंदर
सारी उस जिस्म की ये माया है
आग उस की भी मिटती जाती है
जिस्म पे थूकने वो आया है
बाग़ में फूल बन के बैठा हूँ
दिल मेरा तितलियों पे आया है
— Amanpreet singh
दिल ज़मीं पे शजर लगाया है
जो महक है गुलाब के अंदर
सारी उस जिस्म की ये माया है
आग उस की भी मिटती जाती है
जिस्म पे थूकने वो आया है
बाग़ में फूल बन के बैठा हूँ
दिल मेरा तितलियों पे आया है
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