दिल कहे है वार मुझ कोतिश्नगी पे हार मुझ कोहाल है नाशाद मेरादेख ले इक बार मुझ कोनाख़ुदा तू डर गया हैदे ज़रा पतवार मुझ कोचाँद तारे जल गए हैंदेख कर इस बार मुझ कोये तिरी ख़ामोश नज़रेंकर गईं बेज़ार मुझ को— Prasoon