आरज़ू है कि उस सेे मुलाक़ात हो
कलयुगी धरती पर ये करामात हो
ये सफ़र कितना आसान हो जाता है
जब मिरे पथ पे तेरे निशानात हो
मौन हूँ इस का कोई सबब है गुरु
सोचता हूँ कभी तो इशारात हो
याद कर लूँगा सारे जवाबात मैं
इश्क़ पर कोई तो इक बयानात हो
— Pritam sihag
कलयुगी धरती पर ये करामात हो
ये सफ़र कितना आसान हो जाता है
जब मिरे पथ पे तेरे निशानात हो
मौन हूँ इस का कोई सबब है गुरु
सोचता हूँ कभी तो इशारात हो
याद कर लूँगा सारे जवाबात मैं
इश्क़ पर कोई तो इक बयानात हो
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