इस तरह से इश्क़ में यारों मैं बहकाया गया
बात थी कुछ औ' मुझे कुछ और बतलाया गया
दाग़ है मेरे ही चेहरे पर ख़बर मुझ को कहाँ
फिर हुआ बस यूँ कि मुझ को शीशा दिखलाया गया
जब रहा था डूब मैं फिर से तुम्हारी याद में
बे-वफ़ा होती है लड़की मुझ को समझाया गया
हम तुम्हें उलफ़त में बस देंगें वफ़ा की ही दुआ
मक़बरा तो एक शहज़ादी का बनवाया गया
पहले उछला फिर उछल-कर वो यकायक रो पड़ा
जैसे बच्चे के खिलौना सामने लाया गया
— Rajnish Vishwakarma















