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दीवार-ओ-दर की ओट में चुपके से रोइए - Rishabh Sharma

दीवार-ओ-दर की ओट में चुपके से रोइए
देखे न कोई आपको देखे से रोइए

चुप-चुप न मुझको बोलिए ऐ मेरे प्यारे दोस्त
मैं रो रहा हूॅं आप भी आगे से रोइए

पहले तो आप सीखिए करते हैं कैसे बात
ये बात क्या हुई कि सलीक़े से रोइए

मातम-ज़दा हैं आप तो चेहरे पे साफ़ हो
मेरी सलाह मानिए पहले से रोइए

चलिए शुरू'अ कीजिए फिर से हमारा दुख
अच्छे से याद कीजिए अच्छे से रोइए

- Rishabh Sharma

Dost Shayari

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