लगने लगी हैं ऐसी मुझे प्यार की बातें
जैसी हैं मेरे देश की सरकार की बातें
ऐ बिछड़े हुए यार तू आया है बहुत याद
जब जब कहीं पे छेड़ी गईं यार की बातें
हो जाऍं मुरीद आप भी ऐ हज़रत ए नासेह
जो छेड़ दूँ उन के लब ओ रुख़्सार की बातें
लेना ही नहीं था जो मुझे वो भी ख़रीदा
कुछ इस तरह प्यारी थीं दुकाँ दार की बातें
— Saif Dehlvi















