तुम घराने से लौट कर आए
हम ज़माने से लौट कर आए
क्या बताएँ कि उस बयाबाँ से
किस बहाने से लौट कर आए
जिस ठिकाने की आरज़ू थी हम
उस ठिकाने से लौट कर आए
ज़िंदगी में तो जा चुके थे हम
मौत आने से लौट कर आए
मेरे आने से उठ चले थे तुम
मेरे जाने से लौट कर आए
चोट दे कर के भागने वाले
चोट खाने से लौट कर आए
— SHABAN NAZIR















