दुनिया वाले हिराब बेचे हैं
और हम हैं गुलाब बेचे हैं
एक बेटी की रूख़सती के लिए
बाप ने सब निसाब बेचे हैं
मैंने दो वक़्त की गिज़ा के लिए
अपनी ग़ज़लों के बाब बेचे हैं
मिस्र वालों ख़रीद लो आओ
हम ये हुस्न-ओ-शबाब बेचे हैं
अपनी औलाद की ख़ुशी को शजर
हमने आँखों के ख़्वाब बेचे हैं
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