vo dekhte hain hamko adavat ki nazar se | वो देखते हैं हमको अदावत की नज़र से

  - Shajar Abbas

वो देखते हैं हमको अदावत की नज़र से
हम देखते हैं जिनको मोहब्बत की नज़र से

जब हमने कहा देखिए हसरत की नज़र से
तो देखा उन्होंने हमें हैरत की नज़र से

दौलत न सही मुझपे मगर पाक है दामन
मत देख मुझे दुनिया हिक़ारत की नज़र से

मक़तल में लरज़ने लगा एक तीर कमाँ में
कमसिन ने जो देखा उसे हैबत की नज़र से

जो जो भी मुख़ालिफ़ है मोहब्बत का जहाँ में
देखूँगा शजर उसको मैं नफ़रत की नज़र से

  - Shajar Abbas

Justaju Shayari

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