वो देखते हैं हमको अदावत की नज़र से
हम देखते हैं जिनको मोहब्बत की नज़र से
जब हमने कहा देखिए हसरत की नज़र से
तो देखा उन्होंने हमें हैरत की नज़र से
दौलत न सही मुझपे मगर पाक है दामन
मत देख मुझे दुनिया हिक़ारत की नज़र से
मक़तल में लरज़ने लगा एक तीर कमाँ में
कमसिन ने जो देखा उसे हैबत की नज़र से
जो जो भी मुख़ालिफ़ है मोहब्बत का जहाँ में
देखूँगा शजर उसको मैं नफ़रत की नज़र से
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