मंच माइक मुशायरा महफ़िलशाइरों का यही सुकून-ए-दिलशौक़ रोज़ी या जो भी समझें आपफ़िक़्र इस में समाज की शामिलइश्क़ हम को हुआ है ग़ज़लों सेअब नहीं हैं हम आप के क़ाबिलरौनक़ें हैं सुकून आँखों कानींद के पर मुशायरे क़ातिलशम्स जज़्बात के समुन्दर काएक अदना सा शे'र है साहिल— Dipanshu Shams