आज मुझ को कुछ फ़साने याद आए
फिर मुहब्बत के ज़माने याद आए
शाम से बैठे जहाँ पर रात करते
शाम वो सारे ठिकाने याद आए
रास्ते में कोई मुझ को मिल गया तो
यार फिर क़िस्से पुराने याद आए
याद आई जब कभी दिल को किसी की
फ़ैज़ साहिर के तराने याद आए
— Shubham Vaishnav















