बहुत ज़रूरी था होनी का होना भी

उस का मिलना बा'द में उस का खोना भी

उस देवी की पीतल की नथ के आगे
फीका लगता है अब मुझ को सोना भी

अपने बीच की दूरी इतनी है जाना
ना काफ़ी है अब नंबर का होना भी

सारी ख़ुशियाँ उस के साथ में बाटूँ मैं
गले लगाकर फिर चाहूँ हूँ रोना भी

मैं तुम से बेहतर कैसे हो सकता हूँ
पार्वती से है शंकर का होना भी

— Uday sharma

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