0

मैंने दिल की बातें बोली, फेंका कोई जाल नहीं - Uday sharma

मैंने दिल की बातें बोली, फेंका कोई जाल नहीं
उसने मेरी आँखें देखी, पर आँखों का हाल नहीं

मेरे सपनों का पूरा होना भी हो जायज़ कैसे?
मैंने उसकी ख़ूबी देखी पर ख़ुदके आमाल नही

ख़ुदको मेरा कर या ना कर, इसमे मर्ज़ी तेरी है
जो भी कहना सीधा कह दे, लेकिन हमको टाल नही

Uday sharma
1

Share this on social media

Aankhein Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Uday sharma

As you were reading Shayari by Uday sharma

Similar Writers

our suggestion based on Uday sharma

Similar Moods

As you were reading Aankhein Shayari