
मैं ने दिल की बातें बोली, फेंका कोई जाल नहीं
उस ने मेरी आँखें देखी, पर आँखों का हाल नहीं
मेरे सपनों का पूरा होना भी हो जाइज़ कैसे?
मैं ने उस की ख़ूबी देखी पर ख़ुदके आमाल नहीं
ख़ुदको मेरा कर या ना कर, इस
में मर्ज़ी तेरी है
जो भी कहना सीधा कह दे, लेकिन हम को टाल नहीं
— Uday sharma















