बन जाते अनजाने लोग
ये जाने पहचाने लोग
ज़ख़्म अगर दिख जाए तो
आ जाते नमक लगाने लोग
जब तक सर पर बोझ ना आए
जाते नहीं कमाने लोग
दिन भर फिरते मंदिर मस्जिद
रात दिखें मय-ख़ाने लोग
उन से तो बस ख़ुदा बचाए
जो है बहुत सियाने लोग
— Vikash sharma
ये जाने पहचाने लोग
ज़ख़्म अगर दिख जाए तो
आ जाते नमक लगाने लोग
जब तक सर पर बोझ ना आए
जाते नहीं कमाने लोग
दिन भर फिरते मंदिर मस्जिद
रात दिखें मय-ख़ाने लोग
उन से तो बस ख़ुदा बचाए
जो है बहुत सियाने लोग
Other ghazal from the same pen
Shers of neend.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling