होना तो नहीं चाहिए पर जान हुआ तो
ये डर है तेरा दिल कहीं ज़िंदान हुआ तो
मेरी तो ये हसरत है मज़ा लूँ मैं तपन का
पर आग का कुछ और ही अरमान हुआ तो
दुत्कार दिया हमने उसे कह के भिखारी
दरवेश के उस भेस में सुलतान हुआ तो
ख़्वाबों में तेरे लम्स से मैं काँप रहा हूँ
ये हादसा गर वस्ल के दौरान हुआ तो
ये सोच के घबराता है हर एक सिपाही
अर्जुन का अगर मेरी तरफ़ ध्यान हुआ तो
क्या हो कि सभी लोग फ़क़त वहम हों मेरा
दुनिया में अकेला ही मैं इंसान हुआ तो
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Vishnu virat
our suggestion based on Vishnu virat
As you were reading Terrorism Shayari Shayari