ख़ुद को ज़रा पहचान यार
कुछ करने की तू ठान यार
कर के मोहब्बत ख़ुद का ही
तुम करते हो नुक़सान यार
कुछ पाने की ज़िद में कभी
खोना नहीं ईमान यार
गीता का जो कुछ कहना है
कहता वही क़ुरआन यार
आख़िर में है होता वही
कहती जो अम्मी जान यार
— Adarsh Akshar
कुछ करने की तू ठान यार
कर के मोहब्बत ख़ुद का ही
तुम करते हो नुक़सान यार
कुछ पाने की ज़िद में कभी
खोना नहीं ईमान यार
गीता का जो कुछ कहना है
कहता वही क़ुरआन यार
आख़िर में है होता वही
कहती जो अम्मी जान यार
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