प्यार था पर दूरियाँ थीं
बंद दिल की खिड़कियाँ थीं
आँख में ग़ुस्सा भरा था
और मन में तल्ख़ियाँ थीं
तितली उड़ना चाहती थी
पैर में पर बेड़ियाँ थीं
मन से जितनी दुश्मनी थी
दिल से उतनी यारियाँ थीं
इश्क़ के रस्ते में हम को
तो मिली तन्हाईयाँ थीं
— Adarsh Akshar















