तोड़ सारी बेड़ियाँ अब
छू ले अपना आसमाँ अब
देते देते थक चुके हैं
ज़िंदगी की इम्तिहाँ अब
देखना गर कुछ नया तो
खोल मन की खिड़कियाँ अब
प्यार सच्चा करने वाला
यार मिलता है कहाँ अब
राह सच की चलते चलते
फट गईं हैं एड़ियाँ अब
— Adarsh Akshar
छू ले अपना आसमाँ अब
देते देते थक चुके हैं
ज़िंदगी की इम्तिहाँ अब
देखना गर कुछ नया तो
खोल मन की खिड़कियाँ अब
प्यार सच्चा करने वाला
यार मिलता है कहाँ अब
राह सच की चलते चलते
फट गईं हैं एड़ियाँ अब
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